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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 16 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 16 • ऋचा / मन्त्र 13

6.16.13

Mantra ID: 6.16.13

त्वाम॑ग्ने॒ पुष्क॑रा॒दध्यथ॑र्वा॒ निर॑मन्थत । मू॒र्ध्नो विश्व॑स्य वा॒घतः॑ ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.16.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! शीश के समान सारे जगत्‌ को धारण करने वाले कमल पत्र पर अथर्वा ऋषि ने तुम्हारा मंथन किया था. (१३)

EN English Translation

O agni! The sage Atharva had churned you on the lotus letter that holds the whole world like shisha. (13)

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