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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 16 • Mantra / Rik 26

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 16 • ऋचा / मन्त्र 26

6.16.26

Mantra ID: 6.16.26

क्रत्वा॒ दा अ॑स्तु॒ श्रेष्ठो॒ऽद्य त्वा॑ व॒न्वन्सु॒रेक्णाः॑ । मर्त॑ आनाश सुवृ॒क्तिम् ॥ (२६)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.16.26 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! यज्ञकर्म द्वारा तुम्हारी सेवा करने वाला यजमान श्रेष्ठ एवं शोभन धन वाला हो तथा सदा तुम्हारी स्तुति करता रहे. (२६)

EN English Translation

O agni! May the host who serves you through yajnakarma be the best and the one with riches and may he praise you forever. (26)

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