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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 16 • Mantra / Rik 32

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 16 • ऋचा / मन्त्र 32

6.16.32

Mantra ID: 6.16.32

त्वं तं दे॑व जि॒ह्वया॒ परि॑ बाधस्व दु॒ष्कृत॑म् । मर्तो॒ यो नो॒ जिघां॑सति ॥ (३२)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.16.32 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि देव! उस दुष्ट व्यक्ति को तुम अपनी ज्वालाओं द्वारा भली प्रकार जलाओ, जो हमारी हिंसा करना चाहता है. (३२)

EN English Translation

O God of agni! Burn well by your flames the wicked one who wants to do us violence. (32)

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