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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 16 • Mantra / Rik 40

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 16 • ऋचा / मन्त्र 40

6.16.40

Mantra ID: 6.16.40

आ यं हस्ते॒ न खा॒दिनं॒ शिशुं॑ जा॒तं न बिभ्र॑ति । वि॒शाम॒ग्निं स्व॑ध्व॒रम् ॥ (४०)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.16.40 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋत्विजो! सुंदर यज्ञों को पूर्ण करने वाले अग्नि की सेवा करो. अध्वर्यु अग्नि को इस प्रकार हाथ से पकड़ते हैं, जैसे कोई बाघ आदि के बच्चे को पकड़ता है. (४०)

EN English Translation

Hey Ritvijo! Serve the agni that completes the beautiful yajnas. Aadhavaryu holds the agni by hand in such a way as someone catches a child of a tiger etc. (40)

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