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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 17 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 17 • ऋचा / मन्त्र 9

6.17.9

Mantra ID: 6.17.9

अध॒ द्यौश्चि॑त्ते॒ अप॒ सा नु वज्रा॑द्द्वि॒तान॑मद्भि॒यसा॒ स्वस्य॑ म॒न्योः । अहिं॒ यदिन्द्रो॑ अ॒भ्योह॑सानं॒ नि चि॑द्वि॒श्वायुः॑ श॒यथे॑ ज॒घान॑ ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.17.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अधिक अन्न के स्वामी इंद्र! जब तुमने आक्रमणकारी वृत्र को धरती पर सोने के लिए मार डाला था, तब तुम्हारे क्रोध एवं वज्र से आकाश भी कांप गया था (९)

EN English Translation

O Lord indra of more grain! When you killed the invading Vritra for sleeping on the earth, the sky trembled with your anger and thunderbolt.

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