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6.20.8
स वे॑त॒सुं दश॑मायं॒ दशो॑णिं॒ तूतु॑जि॒मिन्द्रः॑ स्वभि॒ष्टिसु॑म्नः । आ तुग्रं॒ शश्व॒दिभं॒ द्योत॑नाय मा॒तुर्न सी॒मुप॑ सृजा इ॒यध्यै॑ ॥ (८)
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ऋग्वेद मन्त्र 6.20.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
मनचाहा सुख देने वाले इंद्र ने अति धनी वेतसु, दशोणि, तूलुजि, तुग्र एवं इभ नामक असुरों को द्योतन राजा के समीप जाने को इस प्रकार विवश कर दिया था, जिस प्रकार पुत्र माता के पास जाने को विवश होता है. (८)
EN English Translation
Indra, who gave the desired happiness, had forced the asuras named Vetsu, Dashoni, Tuluji, Tugrah and Ibha to go near the Dinotan king in such a way that the son is forced to go to the mother. (8)