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6.23.3
पाता॑ सु॒तमिन्द्रो॑ अस्तु॒ सोमं॑ प्रणे॒नीरु॒ग्रो ज॑रि॒तार॑मू॒ती । कर्ता॑ वी॒राय॒ सुष्व॑य उ लो॒कं दाता॒ वसु॑ स्तुव॒ते की॒रये॑ चित् ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 6.23.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इंद्र निचोड़े हुए सोम को पीने वाले हैं. इंद्र यज्ञकर्म में कुशल एवं भली प्रकार सोम निचोड़ने वाले एवं स्तुतिकर्तता यजमान को निवासस्थान एवं धन देते हैं. (३)
EN English Translation
Indra is supposed to drink the squeezed Mon. Indra is skilled in yajnakarma and gives abode and money to the soma squeezer and the praise-giving host. (3)