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6.27.2
सद॑स्य॒ मदे॒ सद्व॑स्य पी॒ताविन्द्रः॒ सद॑स्य स॒ख्ये च॑कार । रणा॑ वा॒ ये नि॒षदि॒ सत्ते अ॑स्य पु॒रा वि॑विद्रे॒ सदु॒ नूत॑नासः ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 6.27.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इंद्र ने सोमरस से प्रसन्न होकर, सोमरस पीकर एवं सोमरस से मित्रता स्थापित करके उत्तम कर्म किए. हे इंद्र! प्राचीन एवं नवीन स्तोताओं ने तुमसे यज्ञशाला में सत्कर्म प्राप्त किया था. (२)
EN English Translation
Indra, pleased with Somras, drank somras and made friends with somras and did good deeds. O Indra! The ancient and new stoetas received good deeds from you in the yajnashala. (2)