Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
6.30.2
अधा॑ मन्ये बृ॒हद॑सु॒र्य॑मस्य॒ यानि॑ दा॒धार॒ नकि॒रा मि॑नाति । दि॒वेदि॑वे॒ सूर्यो॑ दर्श॒तो भू॒द्वि सद्मा॑न्युर्वि॒या सु॒क्रतु॑र्धात् ॥ (२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 6.30.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हम इंद्र के उस बल की स्तुति करते हैं, जो असुरों को मारने में कुशल है. इंद्र जिन कामों को धारण करते हैं, कोई भी उन्हें नष्ट नहीं कर सकता. इंद्र प्रतिदिन गोलाकार सूर्य को देखने योग्य बनाते हैं. शोभन-कर्म वाले इंद्र ने सारे संसार को विस्तृत किया है. (२)
EN English Translation
We praise the force of Indra, who is skilled in killing the asuras. No one can destroy the works that Indra possesses. Indra makes the sun visible every day. Indra, who has a shobhan-karma, has expanded the whole world. (2)