Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
6.31.1
अभू॒रेको॑ रयिपते रयी॒णामा हस्त॑योरधिथा इन्द्र कृ॒ष्टीः । वि तो॒के अ॒प्सु तन॑ये च॒ सूरेऽवो॑चन्त चर्ष॒णयो॒ विवा॑चः ॥ (१)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 6.31.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे धनपति इंद्र! तुम धनों के एकमात्र स्वामी हो. हे इंद्र! तुम अपने दोनों हाथों में प्रजा ओं को धारण करते हो. प्रजाएं, पुत्र, जल एवं वीर पुत्र पाने के निमित्त हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. (१)
EN English Translation
O Rich God Indra! You are the sole master of wealth. O Indra! You hold the people in both your hands. We praise you for having people, sons, water and brave sons. (1)