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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 44 • Mantra / Rik 20

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 44 • ऋचा / मन्त्र 20

6.44.20

Mantra ID: 6.44.20

आ ते॑ वृष॒न्वृष॑णो॒ द्रोण॑मस्थुर्घृत॒प्रुषो॒ नोर्मयो॒ मद॑न्तः । इन्द्र॒ प्र तुभ्यं॒ वृष॑भिः सु॒तानां॒ वृष्णे॑ भरन्ति वृष॒भाय॒ सोम॑म् ॥ (२०)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.44.20 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अभिलाषापूरक इंद्र! तुम्हारे जल बरसाने वाले युवा घोड़े पानी फैलाने वाली सागर त॑रगों के समान प्रसन्न होकर तुम्हारे रथ में जुड़े हुए हैं. हे कामवर्षी एवं युवा इंद्र! अध्यर्युगण तुम्हें पत्थरों की सहायता से निचोड़ा गया सोमरस भेंट करते हैं. (२०)

EN English Translation

Oh, this desireful Indra! The young horses that rain your water are attached to your chariot, as happy as the sea waves that spread the water. O kamavarshi and young Indra! The adjugs present you with the somaras squeezed with the help of stones. (20)

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