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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 44 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 44 • ऋचा / मन्त्र 4

6.44.4

Mantra ID: 6.44.4

त्यमु॑ वो॒ अप्र॑हणं गृणी॒षे शव॑स॒स्पति॑म् । इन्द्रं॑ विश्वा॒साहं॒ नरं॒ मंहि॑ष्ठं वि॒श्वच॑र्षणिम् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.44.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यजमानो! हम तुम्हारे कल्याण के निमित्त भक्तों पर अनुग्रह करने वाले, शक्ति के स्वामी, सभी शत्रुओं को हराने वाले, यज्ञकर्म के नेता, अतिशय दाता एवं सबको देखने वाले इंद्र की स्तुति करते हैं. (४)

EN English Translation

O hosts! We praise Indra, who has been gracious to the devotees for your welfare, the lord of power, who defeats all enemies, the leader of yajnakarma, the most forgiving and the seer of all. (4)

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