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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 45 • Mantra / Rik 16

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 16

6.45.16

Mantra ID: 6.45.16

य एक॒ इत्तमु॑ ष्टुहि कृष्टी॒नां विच॑र्षणिः । पति॑र्ज॒ज्ञे वृष॑क्रतुः ॥ (१६)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.45.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

उन्हीं एकमात्र इंद्र की स्तुति करो जो प्रजाओं के स्वामी, विशेष द्रष्टा एवं वर्षा करने वाले के रूप में उत्पन्न हुए थे. (१६)

EN English Translation

Praise the only Indra who was born as the lord of the people, the special seer and the rain-doer. (16)

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