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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 45 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 3

6.45.3

Mantra ID: 6.45.3

म॒हीर॑स्य॒ प्रणी॑तयः पू॒र्वीरु॒त प्रश॑स्तयः । नास्य॑ क्षीयन्त ऊ॒तयः॑ ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.45.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र की उत्तम नीतियां महान्‌ एवं स्तुतियां अनेक हैं. इंद्र के रक्षासाधन कभी समाप्त नहीं होते. (३)

EN English Translation

Indra's best policies are great and many praises. Indra's rakshasadhan never ends. (3)

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