Popular:
ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 45 • Mantra / Rik 30

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 30

6.45.30

Mantra ID: 6.45.30

अ॒स्माक॑मिन्द्र भूतु ते॒ स्तोमो॒ वाहि॑ष्ठो॒ अन्त॑मः । अ॒स्मान्रा॒ये म॒हे हि॑नु ॥ (३०)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 6.45.30 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हमारी परम उन्नतिकारक स्तुतियां तुम्हारे समीप पहुंचें. तुम हमें महान्‌ धन पाने के लिए प्रेरित करो. (३०)

EN English Translation

O Indra! May our most uplifting praises come to you. You inspire us to get great wealth. (30)

卐 HinduText AI