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6.47.14
अव॒ त्वे इ॑न्द्र प्र॒वतो॒ नोर्मिर्गिरो॒ ब्रह्मा॑णि नि॒युतो॑ धवन्ते । उ॒रू न राधः॒ सव॑ना पु॒रूण्य॒पो गा व॑ज्रिन्युवसे॒ समिन्दू॑न् ॥ (१४)
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ऋग्वेद मन्त्र 6.47.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! जलसमूह जिस प्रकार निचले स्थान की ओर बहता है, उसी प्रकार स्तोताओं की स्तुतियां, सोमरूप स्तोत्र विशाल धन व विस्तृत सोमरस तुम्हारे पास जाते हैं. हे वज्रधारी इंद्र! तुम सोमरस में गोरस एवं जल भली प्रकार मिलाते हो. (१४)
EN English Translation
O Indra! Just as the water group flows towards the lower place, so do the praises of the hymns, the somrup stotras, the huge wealth and the vast somras go to you. O thunderbolt Indra! You mix gorus and water well in somras. (14)