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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 48 • Mantra / Rik 22

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 48 • ऋचा / मन्त्र 22

6.48.22

Mantra ID: 6.48.22

स॒कृद्ध॒ द्यौर॑जायत स॒कृद्भूमि॑रजायत । पृश्न्या॑ दु॒ग्धं स॒कृत्पय॒स्तद॒न्यो नानु॑ जायते ॥ (२२)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.48.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

एक बार स्वर्ग उत्पन्न हुआ. एक ही बार धरती बनी. मरुतों की माता पृश्नि से एक बार दूध काढ़ा गया. इसके बाद कुछ भी उत्पन्न नहीं हुआ. (२२)

EN English Translation

Once heaven arose. The earth was created only once. Milk was once brewed from the mother of the maruts. Nothing happened after that. (22)

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