Popular:
ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 49 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 11

6.49.11

Mantra ID: 6.49.11

आ यु॑वानः कवयो यज्ञियासो॒ मरु॑तो ग॒न्त गृ॑ण॒तो व॑र॒स्याम् । अ॒चि॒त्रं चि॒द्धि जिन्व॑था वृ॒धन्त॑ इ॒त्था नक्ष॑न्तो नरो अङ्गिर॒स्वत् ॥ (११)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 6.49.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अतिशय युवा, ज्ञानसंपन्न एवं यज्ञपात्र मरुतो! तुम यजमान की सुंदर स्तुति के समीप आओ. हे नेताओ! तुम इस प्रकार वृद्धि पाकर एवं गतिशील किरणों के समान व्याप्त होकर विलक्षण वृक्षों वाले स्थान को वर्षा द्वारा सींचो. (११)

EN English Translation

O you very young, knowledgeable and sacrificial maruto! You come close to the beautiful praise of the host. Hey leaders! You can so grow and be covered like a moving ray and irrigate the place with extraordinary trees with rain. (11)

卐 HinduText AI