Popular:
ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 50 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 50 • ऋचा / मन्त्र 9

6.50.9

Mantra ID: 6.50.9

उ॒त त्वं सू॑नो सहसो नो अ॒द्या दे॒वाँ अ॒स्मिन्न॑ध्व॒रे व॑वृत्याः । स्याम॒हं ते॒ सद॒मिद्रा॒तौ तव॑ स्याम॒ग्नेऽव॑सा सु॒वीरः॑ ॥ (९)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 6.50.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शक्तिपुत्र अग्नि! आज देवों को इस यज्ञ में बार-बार लाओ. मैं तुम्हारे धनदान में सदा वर्तमान रहूं. हे अग्नि! मैं तुम्हारी रक्षा के कारण शोभन पुत्र-पौत्रों वाला बनू. (९)

EN English Translation

O son of power, agni! Bring the gods again and again to this yagna today. I will always be present in your wealth. O agni! I will be shobhan son-grandson because of your protection. (9)

卐 HinduText AI