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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 51 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 51 • ऋचा / मन्त्र 10

6.51.10

Mantra ID: 6.51.10

ते हि श्रेष्ठ॑वर्चस॒स्त उ॑ नस्ति॒रो विश्वा॑नि दुरि॒ता नय॑न्ति । सु॒क्ष॒त्रासो॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॒ग्निरृ॒तधी॑तयो वक्म॒राज॑सत्याः ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.51.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वरुण, मित्र और अग्नि उत्तम-शक्तिसंपन्न, सत्य-कर्म वाले एवं स्तोताओं के प्रति सच्चे हैं. वे श्रेष्ठ तेज वाले हैं. वे हमारे सभी दुर्गुणों का नाश करें. (१०)

EN English Translation

Varuna, friends and agni are the best-powered, the true-doers and the true to the hymns. They are the best fast ones. Let them destroy all our vices. (10)

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