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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 53 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 53 • ऋचा / मन्त्र 5

6.53.5

Mantra ID: 6.53.5

परि॑ तृन्धि पणी॒नामार॑या॒ हृद॑या कवे । अथे॑म॒स्मभ्यं॑ रन्धय ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.53.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ज्ञानसंपन्न पूषा! लौहदंड द्वारा पणियों के हृदय घायल करो एवं उन्हें हमारे वश में करो. (५)

EN English Translation

O god of wisdom! Injure the hearts of the people with the iron rod and subdue them to us. (5)

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