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6.55.1
एहि॒ वां वि॑मुचो नपा॒दाघृ॑णे॒ सं स॑चावहै । र॒थीरृ॒तस्य॑ नो भव ॥ (१)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 6.55.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे दीप्तिशाली एवं प्रजापतिपुत्र पूषा! तुम्हारा स्तोता मेरे पास आवे. हम दोनों मिलें. तुम हमारे यज्ञ के रक्षक बनो. (१)
EN English Translation
O Radiant and Prajapatiputra Pooja! Come your stota to me. We both meet. You be the protector of our yajna. (1)