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7.1.15
सेद॒ग्निर्यो व॑नुष्य॒तो नि॒पाति॑ समे॒द्धार॒मंह॑स उरु॒ष्यात् । सु॒जा॒तासः॒ परि॑ चरन्ति वी॒राः ॥ (१५)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 7.1.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
वे अग्नि ही हैं, जो अपने प्रज्वलित करने वाले को हिंसक एवं विशाल पाप से बचाते हैं तथा शोभनजन्म वाले वीर जिनकी सेवा करते हैं. (१५)
EN English Translation
It is the agni that saves its igniter from violent and great sin and the heroes of shobhanjanam serve. (15)