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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 1 • Mantra / Rik 25

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 1 • ऋचा / मन्त्र 25

7.1.25

Mantra ID: 7.1.25

नू मे॒ ब्रह्मा॑ण्यग्न॒ उच्छ॑शाधि॒ त्वं दे॑व म॒घव॑द्भ्यः सुषूदः । रा॒तौ स्या॑मो॒भया॑स॒ आ ते॑ यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (२५)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.1.25 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! मेरे लिए तुम अन्नों को विशेषरूप से शुद्ध करना. हे देव! हम हव्ययुक्तों को तुम अन्न दो. हम यजमान और स्तोता दोनों तुम्हारे दान के पात्र बनें. सदा कल्याणों द्वारा हमारा पालन करो. (२५)

EN English Translation

O agni! For me you make the grains especially pure. Oh, God! We give you food to the people. Let us host and stota both be eligible for your donation. Always follow us by welfare. (25)

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