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7.1.4
प्र ते अ॒ग्नयो॒ऽग्निभ्यो॒ वरं॒ निः सु॒वीरा॑सः शोशुचन्त द्यु॒मन्तः॑ । यत्रा॒ नरः॑ स॒मास॑ते सुजा॒ताः ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.1.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
शोभनजन्म वाले ऋत्विज् जहां बैठते हैं, वहां अग्नि लौकिक अग्नियों की अपेक्षा कल्याणकारी, संतान देने वाले एवं अधिक दीप्तिशाली होकर चमकते हैं. (४)
EN English Translation
Where the ritwijas of Shobhanjanma sit, the agni shines more than the cosmic agnis, the welfare, the child-giving, and the brighter. (4)