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7.104.14
यदि॑ वा॒हमनृ॑तदेव॒ आस॒ मोघं॑ वा दे॒वाँ अ॑प्यू॒हे अ॑ग्ने । किम॒स्मभ्यं॑ जातवेदो हृणीषे द्रोघ॒वाच॑स्ते निरृ॒थं स॑चन्ताम् ॥ (१४)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.104.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अग्नि! वया मैं झूठे देवों की भक्ति करता हूं अथवा फल न देने वाले देवों का उपासक हूं? फिर तुम मुझसे क्यों कद्ध हो? झूठ बोलने वाले ही तुम्हारी हिंसा विशेषरूप से प्राप्त करें. (१४)
EN English Translation
O agni! Do I worship false gods or am I a worshiper of the gods who do not give fruit? Then why are you afraid of me? Only those who lie get your violence in particular. (14)