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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 18 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 8

7.18.8

Mantra ID: 7.18.8

दु॒रा॒ध्यो॒३॒॑ अदि॑तिं स्रे॒वय॑न्तोऽचे॒तसो॒ वि ज॑गृभ्रे॒ परु॑ष्णीम् । म॒ह्नावि॑व्यक्पृथि॒वीं पत्य॑मानः प॒शुष्क॒विर॑शय॒च्चाय॑मानः ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.18.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बुरे विचारों वाले एवं मंदबुद्धि शत्रुओं ने विशाल परुष्णी नदी को खोदकर उसके तट गिरा दिए थे. इंद्र की कृपा से सुदास धरती पर विस्तृत हो गए और उन्होंने चायमान के पुत्र कवि को पालतू पशु के समान मारकर धरती पर सुला दिया था. (८)

EN English Translation

The evil-minded and mentally retarded enemies had dug up the vast Parushni river and dropped it on its banks. By indra's grace, sudas expanded on the earth and he had killed the poet, the son of chaiman, like a pet and put him to sleep on the earth. (8)

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