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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 22 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 22 • ऋचा / मन्त्र 5

7.22.5

Mantra ID: 7.22.5

न ते॒ गिरो॒ अपि॑ मृष्ये तु॒रस्य॒ न सु॑ष्टु॒तिम॑सु॒र्य॑स्य वि॒द्वान् । सदा॑ ते॒ नाम॑ स्वयशो विवक्मि ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.22.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शत्रुहिंसक इंद्र! तुम्हारी शक्ति को जानने वाला मैं तुम्हारी स्तुतियों को नहीं त्याग सकता. मैं तुम्हारा असाधारण यशवाला नाम सदा बोलूंगा. (५)

EN English Translation

O enemy, the violent Indra! I, who knows your power, cannot forsake your praises. I will always speak your exceptionally successful name. (5)

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