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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 3 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 3 • ऋचा / मन्त्र 4

7.3.4

Mantra ID: 7.3.4

वि यस्य॑ ते पृथि॒व्यां पाजो॒ अश्रे॑त्तृ॒षु यदन्ना॑ स॒मवृ॑क्त॒ जम्भैः॑ । सेने॑व सृ॒ष्टा प्रसि॑तिष्ट एति॒ यवं॒ न द॑स्म जु॒ह्वा॑ विवेक्षि ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.3.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! जिस समय तुम ज्वालारूपी दांतों से काष्ठरूपी अन्न को खाते हो, उस समय तुम्हारा तेज शीघ्रता से धरती पर फैलता है. तुम्हारी ज्वाला सेना के समान उन्मुक्त होकर जाती है. हे दर्शनीय अग्नि! तुम अपनी ज्वालाओं से काष्ठों में जौ आदि के समान प्रवेश करते हो. (४)

EN English Translation

O agni! At the time when you eat wooden grain with flammatic teeth, your speed quickly spreads to the earth. Your flame is liberated like an army. O glorious agni! You enter the woods from your flames like barley etc. (4)

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