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7.33.5
उद्द्यामि॒वेत्तृ॒ष्णजो॑ नाथि॒तासोऽदी॑धयुर्दाशरा॒ज्ञे वृ॒तासः॑ । वसि॑ष्ठस्य स्तुव॒त इन्द्रो॑ अश्रोदु॒रुं तृत्सु॑भ्यो अकृणोदु लो॒कम् ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.33.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
प्यासे एवं राजाओं से घिरे हुए वसिष्ठपुत्रों ने वर्षा की याचना करते हुए दाशराज्ञ युद्ध में इंद्र को सूर्य के समान ऊपर उठाया था. वसिष्ठ की स्तुतियां इंद्र ने सुनी थी एवं तृत्सु राजाओं को विस्तृत राज्य दिया था. (५)
EN English Translation
The thirsty and surrounded by kings, vasishtaputras raised Indra like the sun in the Dashragyana war, pleading for rain. The praises of Vasishta were heard by Indra and gave a wide kingdom to the Tritsu kings. (5)