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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 5 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 5 • ऋचा / मन्त्र 5

7.5.5

Mantra ID: 7.5.5

त्वाम॑ग्ने ह॒रितो॑ वावशा॒ना गिरः॑ सचन्ते॒ धुन॑यो घृ॒ताचीः॑ । पतिं॑ कृष्टी॒नां र॒थ्यं॑ रयी॒णां वै॑श्वान॒रमु॒षसां॑ के॒तुमह्ना॑म् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.5.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वैश्वानर अग्नि! तुम प्रजाओं के स्वामी, धनों के नेता तथा उषाओं व दिवसों के केतु हो. तुम्हारी कामना करते हुए अश्व एवं मानवों की पापरहित तथा हव्ययुक्त स्तुतियां तुम्हारी सेवा करती हैं. (५)

EN English Translation

O global agni! You are the lord of the people, the leader of the wealth, and the ketu of the ushas and the days. The sinless and human praises of the horse and the human beings, while wishing you, serve you. (5)

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