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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 64 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 3

7.64.3

Mantra ID: 7.64.3

मि॒त्रस्तन्नो॒ वरु॑णो दे॒वो अ॒र्यः प्र साधि॑ष्ठेभिः प॒थिभि॑र्नयन्तु । ब्रव॒द्यथा॑ न॒ आद॒रिः सु॒दास॑ इ॒षा म॑देम स॒ह दे॒वगो॑पाः ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.64.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मित्र, वरुण और अर्यमा हमें चाहे जब श्रेष्ठ मार्ग द्वारा ले जावें. अर्यमा शोभन दाता के पास जाकर हमारी बात कहें. हम देवों द्वारा रक्षित होकर उनके दिए अन्न एवं संतान के साथ प्रसन्न हों. (३)

EN English Translation

Friends, Varun and Aryama take us by the best path whenever they want. Go to Aryama Shobhan Daata and tell us. May we be protected by the gods and pleased with their food and children. (3)

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