Popular:
ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 64 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 4

7.64.4

Mantra ID: 7.64.4

यो वां॒ गर्तं॒ मन॑सा॒ तक्ष॑दे॒तमू॒र्ध्वां धी॒तिं कृ॒णव॑द्धा॒रय॑च्च । उ॒क्षेथां॑ मित्रावरुणा घृ॒तेन॒ ता रा॑जाना सुक्षि॒तीस्त॑र्पयेथाम् ॥ (४)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 7.64.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शास्ता मित्र व वरुण! स्तुतियों के साथ जो तुम्हारा रथ बनाता है, तुम्हारे निमित्त श्रेष्ठ कर्म करता है एवं यज्ञ में तुम्हें धारण करता है, उसे जल से सींचो एवं शोभननिवास वाला बनाकर तृप्त करो. (४)

EN English Translation

O Shasta friend and Varun! With the praises, who makes your chariot, does the best deeds for you and holds you in the yajna, fill him with water and make him full of adornment. (4)

卐 HinduText AI