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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 66 • Mantra / Rik 17

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 66 • ऋचा / मन्त्र 17

7.66.17

Mantra ID: 7.66.17

काव्ये॑भिरदा॒भ्या या॑तं वरुण द्यु॒मत् । मि॒त्रश्च॒ सोम॑पीतये ॥ (१७)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.66.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अपराजेय एवं तेजस्वी मित्र तथा वरुण! तुम हमारे स्तोत्र सुनकर सोम पीने के लिए आओ. (१७)

EN English Translation

O unbeatable and brilliant friend and Varun! You come to drink mon listening to our hymns. (17)

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