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7.69.7
यु॒वं भु॒ज्युमव॑विद्धं समु॒द्र उदू॑हथु॒रर्ण॑सो॒ अस्रि॑धानैः । प॒त॒त्रिभि॑रश्र॒मैर॑व्य॒थिभि॑र्दं॒सना॑भिरश्विना पा॒रय॑न्ता ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.69.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अश्विनीकुमारो! तुमने समुद्र में डूबते हुए भुज्यु को क्षीण न होने वाले, न थकने वाले एवं तेज चलने वाले घोड़ों द्वारा एवं अपने शारीरिक प्रयत्नों द्वारा पार लगाया. (७)
EN English Translation
O Ashwinikumaro! You crossed the sinking Bhujyu in the sea by unstaining, nor tired, fast-moving horses and by your physical efforts. (7)