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7.70.6
यो वां॑ य॒ज्ञो ना॑सत्या ह॒विष्मा॑न्कृ॒तब्र॑ह्मा सम॒र्यो॒३॒॑ भवा॑ति । उप॒ प्र या॑तं॒ वर॒मा वसि॑ष्ठमि॒मा ब्रह्मा॑ण्यृच्यन्ते यु॒वभ्या॑म् ॥ (६)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.70.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अश्चिनीकुमारो! जो स्तुतिपरायण, हव्ययुक्त एवं ऋत्विजों से युक्त वसिष्ठ तुम्हारा यजमान है, उसी श्रेष्ठ के पास जाओ. ये स्तुतियां यहां आने के लिए तुम्हारी स्तुति करती हैं. (६)
EN English Translation
O aschinikumaro! Go to the best of the one who is your host, the vasishtha, which is your host with praises, the hakyayuktas and the sages. These praises praise you for coming here. (6)