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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 92 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 92 • ऋचा / मन्त्र 5

7.92.5

Mantra ID: 7.92.5

आ नो॑ नि॒युद्भिः॑ श॒तिनी॑भिरध्व॒रं स॑ह॒स्रिणी॑भि॒रुप॑ याहि य॒ज्ञम् । वायो॑ अ॒स्मिन्सव॑ने मादयस्व यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.92.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वायु! अपने सैकड़ों एवं हजारों घोड़ों की सहायता से हमारे यज्ञ के पास आओ एवं इस यज्ञ में सोमरस पीकर प्रसन्न बनो. हे देवो! रक्षासाधनों द्वारा हमारा सदा कल्याण करो. (५)

EN English Translation

O air! With the help of your hundreds and thousands of horses, come to our yajna and be happy to drink somras in this yajna. Oh, God! Always do our well-being by means of defense. (5)

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