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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 94 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 94 • ऋचा / मन्त्र 1

7.94.1

Mantra ID: 7.94.1

इ॒यं वा॑म॒स्य मन्म॑न॒ इन्द्रा॑ग्नी पू॒र्व्यस्तु॑तिः । अ॒भ्राद्वृ॒ष्टिरि॑वाजनि ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.94.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र एवं अग्नि! इस स्तोता से यह उत्तम स्तुति उसी प्रकार उत्पन्न हुई है, जिस प्रकार बादल से वर्षा होती है. (१)

EN English Translation

O Indra and Agni! From this hymn, this fine praise is produced in the same way as it rains from the cloud. (1)

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