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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 94 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 94 • ऋचा / मन्त्र 5

7.94.5

Mantra ID: 7.94.5

ता हि शश्व॑न्त॒ ईळ॑त इ॒त्था विप्रा॑स ऊ॒तये॑ । स॒बाधो॒ वाज॑सातये ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.94.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बुद्धिमान्‌ लोग अपनी रक्षा के लिए इंद्र व अग्नि दोनों की इस प्रकार स्तुति करते हैं. समान कष्ट भोगने वाले लोग अन्न पाने के लिए स्तुति करते हैं. (५)

EN English Translation

Wise people praise both Indra and Agni for their protection in this way. People suffering the same praise for getting food. (5)

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