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8.11.5
मर्ता॒ अम॑र्त्यस्य ते॒ भूरि॒ नाम॑ मनामहे । विप्रा॑सो जा॒तवे॑दसः ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.11.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हम मरणधर्मा ब्राहमण तुझ मरणरहित अग्नि की विशाल स्तुतियां करेंगे. (५)
EN English Translation
We, the moribund Brahmins, will make you great praises of the unmasked agni. (5)