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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 12 • Mantra / Rik 31

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 12 • ऋचा / मन्त्र 31

8.12.31

Mantra ID: 8.12.31

इ॒मां त॑ इन्द्र सुष्टु॒तिं विप्र॑ इयर्ति धी॒तिभिः॑ । जा॒मिं प॒देव॒ पिप्र॑तीं॒ प्राध्व॒रे ॥ (३१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.12.31 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! बुद्धिमान्‌ स्तोता यज्ञ में प्रसन्नता देने वाली शोभन स्तुति अपने सेवाकार्यों द्वारा इस प्रकार तुम्हारे पास भेजता है जिस प्रकार लोग अपने बंधु उत्तम स्थान में भेजते हैं. (३१)

EN English Translation

O Indra! The wise hymn sends you the joyful praise in the yajna through his service deeds in the same way that people send their brothers to the best place. (31)

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