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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 12 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 12 • ऋचा / मन्त्र 7

8.12.7

Mantra ID: 8.12.7

व॒व॒क्षुर॑स्य के॒तवो॑ उ॒त वज्रो॒ गभ॑स्त्योः । यत्सूर्यो॒ न रोद॑सी॒ अव॑र्धयत् ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.12.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र जब सूर्य के समान द्यावा-पृथिवी को वर्षा द्वारा बढ़ाते हैं, तब इंद्र के रथ पर लगे ध्वज एवं उनका वज्र हमें अनेक कल्याण देते हैं. (७)

EN English Translation

When Indra increases the dyava-prithvivi like the sun by rain, the flags on Indra's chariot and his thunderbolt give us many good. (7)

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