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8.13.23
उ॒त ते॒ सुष्टु॑ता॒ हरी॒ वृष॑णा वहतो॒ रथ॑म् । अ॒जु॒र्यस्य॑ म॒दिन्त॑मं॒ यमीम॑हे ॥ (२३)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.13.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे जरारहित इंद्र! तुम्हारे भली प्रकार स्तुत एवं अभिलाषापूरक घोड़े तुम्हारे रथ को यहां लावें. हे अतिशय प्रसन्न इंद्र! हम तुमसे याचना करते हैं. (२३)
EN English Translation
O indra without a little! May your well-praised and wishing horses bring your chariot here. O very happy Indra! We beg you. (23)