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8.15.2
यस्य॑ द्वि॒बर्ह॑सो बृ॒हत्सहो॑ दा॒धार॒ रोद॑सी । गि॒रीँरज्रा॑ँ अ॒पः स्व॑र्वृषत्व॒ना ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.15.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
द्यावा-पृथिवी दोनों स्थानों में पूज्य इंद्र की महती शक्ति द्यावा-पृथिवी को धारण करती है. इंद्र अपनी शक्ति द्वारा शीघ्रगामी बादलों एवं बहने वाले जलों को धारण करते हैं. (२)
EN English Translation
In both the places, the great power of the revered Indra holds the Dyava-Prithvivi. Indra by his power holds the fast-moving clouds and flowing waters. (2)