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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 15 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 15 • ऋचा / मन्त्र 8

8.15.8

Mantra ID: 8.15.8

तव॒ द्यौरि॑न्द्र॒ पौंस्यं॑ पृथि॒वी व॑र्धति॒ श्रवः॑ । त्वामापः॒ पर्व॑तासश्च हिन्विरे ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.15.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! स्वर्गलोक तुम्हारी शक्ति और धरती तुम्हारा यश बढ़ाती है. पर्वत एवं अंतरिक्ष तुम्हें प्रसन्न करते हैं. (८)

EN English Translation

O Indra! Paradise increases your power and earth your glory. Mountains and space please you. (8)

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