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8.17.10
दी॒र्घस्ते॑ अस्त्वङ्कु॒शो येना॒ वसु॑ प्र॒यच्छ॑सि । यज॑मानाय सुन्व॒ते ॥ (१०)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.17.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! तुम्हारा वह अंकुश बड़ा हो, जिससे तुम सोमरस निचोड़ने वाले यजमान को धन हो. (१०)
EN English Translation
O Indra! Your curb is big, so that you have wealth to the host who squeezes the somras. (10)