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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 18 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 2

8.18.2

Mantra ID: 8.18.2

अ॒न॒र्वाणो॒ ह्ये॑षां॒ पन्था॑ आदि॒त्याना॑म् । अद॑ब्धाः॒ सन्ति॑ पा॒यवः॑ सुगे॒वृधः॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.18.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इन अदितिपुत्रों के मार्ग दूसरों के गमन से रहित एवं हिंसाशून्य हैं. वे मार्ग पालन करने वाले और सुखवर्धक हैं. (२)

EN English Translation

The paths of these sons of Aditi are devoid of the movement of others and violenceless. They are path-keepers and comforters. (2)

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