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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 20 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 20 • ऋचा / मन्त्र 9

8.20.9

Mantra ID: 8.20.9

प्रति॑ वो वृषदञ्जयो॒ वृष्णे॒ शर्धा॑य॒ मारु॑ताय भरध्वम् । ह॒व्या वृष॑प्रयाव्णे ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.20.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम की वर्षा से सींचने वाले अध्वर्युगण! वर्षा करने वाले मरुतों की शक्ति बढ़ाने के लिए हव्य अर्पित करो. इस हव्य के द्वारा मरुदगण वर्षाकारक एवं उत्तमगति वाले बनते हैं. (९)

EN English Translation

O the rain-watering teachers of Mon! Offer a havya to increase the power of the rainy maruts. Through this havan, the deserts become rain-fed and have good speed. (9)

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