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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 22 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 22 • ऋचा / मन्त्र 10

8.22.10

Mantra ID: 8.22.10

याभिः॑ प॒क्थमव॑थो॒ याभि॒रध्रि॑गुं॒ याभि॑र्ब॒भ्रुं विजो॑षसम् । ताभि॑र्नो म॒क्षू तूय॑मश्वि॒ना ग॑तं भिष॒ज्यतं॒ यदातु॑रम् ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.22.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्चिनीकुमारो! तुमने जिन रक्षासाधनों द्वारा पक्थ, अध्रिगु एवं सोमरस द्वारा विशेषरूप से प्रसन्न करने वाले बश्चु की रक्षा की थी, उन्हीं रक्षासाधनों द्वारा तुरंत शीघ्र गति से हमारे समीप आओ तथा रोगी का इलाज करो. (१०)

EN English Translation

O aschinikumaro! By the means of which you protected the beast, especially pleasing by pakth, adhrigu and somras, by the same means of defense, come to us immediately at a speedy pace and treat the patient. (10)

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