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8.23.27
वंस्वा॑ नो॒ वार्या॑ पु॒रु वंस्व॑ रा॒यः पु॑रु॒स्पृहः॑ । सु॒वीर्य॑स्य प्र॒जाव॑तो॒ यश॑स्वतः ॥ (२७)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.23.27 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अग्नि! हमें गौ आदि वरणीय संपत्ति तथा बहुतों द्वारा इच्छित धन दो जो शोभन शक्ति वाले पुत्र-पौत्रों से युक्त एवं कीर्ति वाला हो. (२७)
EN English Translation
O agni! Give us the wealth of cows, etc., and the money desired by many, which is full of sons and grandsons with adornment and fame. (27)